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हैलो मेरा नाम आनन्द है। मैं जो कहानी आपको बताने जा रहा हूँ वो एकदम सत्य तो है ही, साथ ही यह घटना मेरे साथ सिर्फ़ 6 दिन पहले हुई है।
तो हुआ यह कि मैं अपने कंप्यूटर पर बैठा ब्लू-फिल्म देख रहा था, तभी कुछ देर में मेरे पापा आ गए, मैंने सब बंद कर दिया।
वे बोले- चलो आज सबको घुमा कर लाते हैं।
मैंने सोचा अगर मैं गया तो सारा मज़ा बेकार हो जाएगा, इसलिए मैंने जाने से मना कर दिया।
सब चले गए, मैं घर में अकेला था, मैंने फिर से ब्लू-फिल्म चालू कर दी।
तभी मेरी बहन की सहेली उसे पूछने आ गई कि मेरी बहन कहाँ है?
मैंने कहा- सब बाहर गए हैं।
तो उसने मुझसे पूछा- तुम क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कंप्यूटर पर बैठा हूँ।
तो बोली- मैं अपनी मेल चैक कर लूँ?
मैंने ‘हाँ’ कह दिया।
मैंने कहा- तुम अपना काम करो.. मैं ज़रा टॉयलेट से हो कर आता हूँ।
जब मैं आने को हुआ तो मुझे याद आया कि मैंने वीडियो प्लेयर बंद नहीं किया था और नीलम सब कुछ देख रही थी।
मैं उसे खिड़की से देखता रहा।
उसका चेहरा कंप्यूटर की तरफ़ होने से उसने पीछे नहीं देखा कि मैं पीछे खड़ा हूँ।
वो सब कुछ देख रही थी और बहुत गर्म हो चुकी थी। इतने में उसने अपने मम्मे ऊपर से दबाने शुरु कर दिए।
मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं तो पक्का फ़ैसला कर चुका था कि हो ना हो, ये आज मुझसे चुद कर ही जाएगी।
फिर मैं थोड़ा और पीछे चला गया और मैंने हल्की सी आवाज़ निकाली, वो समझ गई कि मैं आ रहा हूँ।
उसने प्लेयर बंद कर दिया।
मैं आया तो उससे पूछा- मेल चैक कर लिए?
तो बोली- हाँ.. कर लिए।
फिर मैंने हिम्मत बांध कर उससे कह ही दिया- नीलम तुम जो देख रही थी वो मैं पीछे खिड़की के पास खड़ा होकर देख रहा था।
तो वो शर्म गई और कुछ नहीं बोली।
मैं समझ गया कि मामला फ़िट हो गया।
मैंने दोबारा ब्लू-फिल्म चालू कर दी, अब हम दोनों देखने लगे।
वो तो गर्म हो ही चुकी थी।
तभी मैंने कहा- देखती ही रहोगी या फिर?
तो वो हल्की सी मुस्कुराहट लाई।
मैंने तभी बिना वक्त गंवाए किए उसकी जांघ पर हाथ रख दिया।
उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया।
फिर मैं अपने हाथ को धीरे-धीरे उसके ऊपर की तरफ़ लाने लगा।
उसके मम्मों को दबाना शुरु किया, फिर उसे चुम्बन करने लगा।
फिर मैंने उसका एक हाथ अपने लंड पर रख दिया, वो उसके साथ खेलने लगी।
करीब 5 मिनट तक हम चुम्बन करते रहे।
फिर मैं उसे बिस्तर पर ले आया और धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगा।
मैंने पहले उसका कमीज उतारा तो उसकी ब्रा दिखने लगी।
मैंने उसकी ब्रा भी उतार कर उसकी चूचियाँ मसल दी।
उसके मुँह से अजीब-अजीब सी आवाज़ें निकालने लगी.. मानो कह रही हो कि मेरी चूत को जल्दी शांत करो।
उसके रस से भरे मम्मों को देख कर मैं दंग रह गया। मैंने उसको चाटना शुरु कर दिया
तो बोली- पहले कपड़े तो उतार लो।
फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार उतार दी।
उसने काले रंग की पैंटी पहनी थी। फिर मैंने उसे मेरे कपड़े उतारने को कहा तो उसने पहले मेरी पैंट, फिर कच्छा उतारा।
मैं बनियान में था तो बनियान मैंने खुद उतार दी।
तो वो बोली- यह क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- असली मज़ा तो इसी में है।
उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, कहने लगी- खा जाओ, फाड़ डालो मेरी चूत को और आऊऊ ज़ोर से… आअह्ह्ह ह्म्म..’
फिर मैंने अपना 6′ इंच का लंड उसके हाथ में दे दिया और कहा- इसे चाटो।
उसने फ़टाफ़ट अपने मुँह में ले लिया और चाटने लगी।
मेरे लंड से हल्का-हल्का पानी निकलने लगा, मैंने कहा- ये अमृत है इसे पी जाओ।
वो पीकर बोली- खट्टा-खट्टा है।
फिर मैं उसके पैरों के पास गया और उसकी टांगें फ़ैला दीं और उससे कहा- अपनी चूत का छेद खोलो।
उसने अपने चूत का छेद और चौड़ा कर दिया।
फिर मैंने अपना लंड जैसे ही उसकी चूत पर रखा तो उसके मुँह से ‘आआह्ह्ह’ की आवाज़ निकली।
मैंने एक झटका दिया और आधा लंड उसकी चूत में अटक गया, तो वो चिल्ला पड़ी और बोली- बाहर निकालो.. प्लीज बहुत दर्द हो रहा है
मैं कुछ देर हल्के-हल्के झटके देता रहा उसकी चूत से खून निकलने लगा, मगर उसने नहीं देखा।
फिर जब वो पूरे जोश में आ गई तो मैंने एक तगड़ा झटका और दिया और पूरा 6′ का मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया और वो फिर से चिल्लाई।
मगर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चिल्लाने नहीं दिया।
कुछ देर तक उसको चूमने और चूसने के बाद वो और गरम हो गई। उसके मुँह से आवाज़ निकली- और घुसाओ..और ज़ोर से..चोदो..
मैंने अपनी रफ़्तार और बढ़ा दी अब वो भी अपने चूतड़ उठा-उठा कर साथ देने लगी और हमारी आवाज़ें निकलती रहीं ‘आअह्ह ह्हह अह्ह मम्म.. हये मार डाला… और ज़ोर से…’
उसका पूरा छेद मैंने फ़ाड़ डाला।
करीब आधे घंटे बाद उसका पानी निकल गया मगर मैं उसे कुछ देर तक और चोदता रहा, फिर मेरा भी पानी निकल गया।
मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में डाल दिया और उसे पिला दिया।
फिर मैंने उसे अपना लंड चाटने को कहा तो बोली- अब तो मैं चुद चुकी हूँ, अब क्या?
तो मैंने कहा- दोबारा मेरा लंड खड़ा करो।
हम दोनों 69 की अवस्था में हो गए, मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।
मैंने अब उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गांड में एक हल्का सा झटका दिया और उसकी तो मानो जान ही निकल गई हो मगर मैं हटा नहीं।
थोड़ी देर ऐसे ही रहा।
फिर थोड़ी देर बाद एक ज़बरदस्त झटका दिया और उसका मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया। उसकी हालत तो ऐसी हो गई मानो मरने ही वाली हो।
फिर मैं ऐसे ही झटके मारता रहा। फिर वो भी मज़े लेने लगी- आआह्हह्ह..ह्हह्हह घुसाओ फ़ाड़ो और अपना पूरा बम्बू मेरी चूत में घुसा दो..और ज़ोर से..
करीब दस मिनट बाद मैंने पानी छोड़ दिया और सारा वीर्य उसकी गांड में छोड़ दिया।
फिर मैं उसे चुम्बन करता रहा और थोड़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे।
फिर उस दिन से मैंने उसे चोदने का सिलसिला रोज़ शुरु कर दिया। जो शायद अब उसकी शादी पर ही खत्म होगा।