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मजबूर हालत की मारी औरत की चुदाई - अहह नही ओह्ह् बस बच्चे उठ जाएँगे 

मजबूर हालत की मारी औरत की चुदाई - अहह नही ओह्ह् बस बच्चे उठ जाएँगे : मेरा नाम रचना है...मेरा जनम एक साधारण परिवार मे यूपी के एक छोटे से गाँव मे हुआ … मेरे घर मुझे से बड़ी एक बहन और एक भाई है दोनो की शादी हो चुकी है … ये तब के बात है जब मेरी एज 18 साल थी.. अभी जवानी आनी शुरू ही हुई थी तब मेरी दीदी की शादी को 5 साल हो चुके थे और मे 12 मे पढ़ रही थी…

एक दिन जब मे स्कूल से घर आई, तो घर मे मातम छाया हुआ था… मा नीचे ज़मीन पर बैठी रो रही थी जब मेने मा से पूछा तो मा ने कोई जवाब नही दिया.. और पापा जो एक कोने मे खड़े रो रहे थे .. उन्होने मुझे उठाया, और मेरी ओर देखते हुए बोले….. बेटा तुम्हारी दीदी हमे छोड़ कर इस दुनिया से चली गयी….

मेरे पैरो के तले से ज़मीन खिसक गयी, और मे फूट -2 कर रोने लगी…दीदी को एक बेटी थी जो शादी के एक साल बाद हुई थी मे अपने सारे परिवार के साथ जीजा जी के घर के लिए चली गयी दीदी की अंतिम क्रिया हुई

उसके बाद धीरे -2 सब नॉर्मल होने लगे… दीदी की मौत के दो महीने बाद जीजा जी अपनी बेटी को लेकर हमारे घर आए… तब मे स्कूल गयी हुई थी… जीजा जी के घर वालों से किया बात हुई, मुझे पता नही…. पर जब मे घर पहुचि तो, मा मुझे एक रूम मे ले गयी, और मुझे से बोली…..

मा: बेटा मेरी बात ध्यान से सुन…. तुझे तो पता है ना अब तेरी दीदी के गुजर जाने के बाद… तेरी दीदी की बेटी की देख भाल करने वाला कोई नही है, और तेरे जीजा जी दूसरी शादी करने जा रहे हैं… अब सिर्फ़ तुम ही अपनी दीदी की बेटी की जिंदगी खराब होने से बचा सकती हो….

मे: (हैरान होते हुए) मे पर कैसे मा…..

मा: बेटा तूँ अपने जीजा से शादी कर ले… यहीं आख़िरी रास्ता है…. देख बेटी मना मत करना… मे तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ…(और मा की आँखों मे आँसू आ गये)

मे: (मा के आँसू मुझेसे देखे ना गये) ठीक है मा , आप जो भी कहो जी…मे करने के लाए तैयार हूँ..

मा: बेटा तूने मेरी बात मान कर, मेरे दिल से बहुत बड़ा बोझ उतार दिया है…

और उसके बाद मा दूसरे रूम मे चली गयी…. दीदी की मौत के 6 महीने बाद, मेरी शादी मेरे जीजा जी से करवा दी गये…मेरे सारे अरमानो की बलि दे दी गयी…

जीजा जी अब मेरे पति बन चुके थे….उनका नाम गोपाल थाशादी के बाद मे जब अपने ससुराल पहुचि…रात को मेरी सास ने मुझे, घर के कमरे मे बैठा दिया…बिस्तर ज़मीन पर लगा हुआ था…घर कच्चा था…यहाँ तक के घर का फर्श भी कच्चा ही था….मे नीचे ज़मीन पर लगे हुए बिस्तर पर बैठी… अपनी आने वाली जिंदगी के बारे मे सोच रही थी….ऐसा नही था की मुझे सेक्स के बारे मे कुछ नही पता था…. पर बहुत ज़्यादा भी नही जानती थी…

अचानक रूम का डोर खुला, और गोपाल अंदर आ गये…अंदर आते ही उन्होने डोर को लॉक किया और मेरे पास आकर बैठ गये….मे एक दम से घबरा गयी… मेरे दिल की धड़कन एक दम तेज़ी से चल रही थी…..कुछ देर बैठने के बाद वो अचानक से बोले

गोपाल:अब बैठी ही रहोगी चल खड़ी हो कर अपनी सारी उतार

मे एक दम से घबरा गयी…मुझे ये उम्मीद बिकुल भी नही थी, की कोई आदमी अपनी सुहाग रात को ऐसे अपनी पत्नी से पेश आता होगा…

गोपाल: क्या हुआ सुनाई नही दिया …. चल जल्दी कर अपनी सारी उतार…

मेरे हाथ पैर काँपने लगे…माथे पर पसीना आने लगा…दिल के धड़कन तेज हो गयी….मे किसी तरहा खड़ी हुई, और अपनी सारी को उतारने लगी...जब मे सारी उतार रही थी..तो गोपाल एक दम से खड़े हो गये….और अपना पयज़ामा और कुर्ता उतार कर खुंते से टाँग दिया, और फिर से बिस्तर पर लेट गये…मे अपनी सारी उतार चुकी थी…अब मेरे बदन पर पेटिकॉट और ब्लाउस ही था….और उसके अंदर पॅंटी और ब्रा…गोपाल ने मुझे हाथ से पकड़ कर खींचा…मे बिस्तर पर गिर पड़ी…

गोपाल: क्यो इतना टाइम लगा रही हो… इतने टाइम मे तो मे तुम्हें दो बार चोद चुका होता…चल अब लेट जा…

गोपाल ने मुझे पीठ के बल लेता दिया….जैसे मेने अपनी सहेलियों से सुहागरात के बारे मे सुन रखा था…वैसा अब तक बिल्कुल कुछ भी नही हुआ था…उन्होने एक ही झटके मे मेरे पेटिकॉट को खींच कर मेरी कमर पर चढ़ा दिया,और मेरी जाँघो को फैला कर, मेरी जाँघो के बीच मे घुटनो के बल बैठ गये…मेने शरम के मारे आँखें बंद कर ली…आख़िर मे कर भी क्या सकती थी…और आने वालों पलों का धड़कते दिल के साथ इंतजार करने लगी…गोपाल के हाथ मेरी जाँघो को मसल रहे थे…मे अपनी मुलायम जाँघो पर गोपाल के खुरदारे और, सख़्त हाथों को महसूस करके, एक दम सिहर गयी…वो मेरी जाँघो को बुरी तराहा मसल रहा था…मेरी दर्द के मारे जान निकली जा रही थी…पर तब तक मे दर्द को बर्दास्त कर रही थी, और अपनी आवाज़ को दबाए हुए थी…

फिर एका एक उन्होने ने मेरी पॅंटी को दोनो तरफ से पकड़ कर, एक झटके मे खींच दिया… मेरे दिल की धड़कन आज से पहले इतनी तेज कभी नही चली थी…उसे बेरहम इंसान को अपने सामने पड़ी नाज़ुक सी लड़की को देख कर भी दया नही आ रही थी…फिर गोपाल एक दम से खड़ा हुआ और, अपना अंडरवेर उतार दिया…कमरे मे लालटेन जल रही थी…लालटेन की रोशनी मे उसका काला लंड, जो कि 5 इंच से ज़यादा लंबा नही था, मेरी आँखों के सामने हवा मे झटके खा रहा था…गोपाल फिर से मेरी जाँघो के बीच मे बैठ गया, और मेरी जाँघो को फैला कर, अपने लंड के सुपाडे को मेरी चूत के छेद पर टिका दिया…मेरे जिस्म मे एक पल के लिए मस्ती की लहर दौड़ गयी…चूत के छेद और दीवारों पर सरसराहट होने लगी…पर अगले ही पल मेरी सारी मस्ती ख़तम हो गयी…उस जालिम ने बिना कोई देर किए, अपनी पूरी ताक़त के साथ अपना लंड मेरी चूत मे पेल दिया… मेरी आँखें दर्द के मारे फॅट गयी,और दर्द के मारे चिल्ला पड़ी…मेरी आँखों से आँसू बहने लगे…पर उस हवसि दरिंदे ने मेरी चीखों की परवाह किए बगैर एक और धक्का मारा, मेरा पूरा बदन दर्द के मारे एन्थ गया…मेरे मुँह से चीख निकलने ही वाली थी की, उसने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख दिया… और मेरी चीख मेरे मुँह के अंदर ही घुट कर रह गये…मे रोने लगी

मे: (रोते हुए) बहुत दर्द हो रहा है इसे निकल लो जी आह

गोपाल: चुप कर साली, क्यों नखरे कर रही है पहली बार दर्द होता है…अभी थोड़ी देर मे ठीक हो जाएगा…

 मे रोती रही, गिड्गिडाति रही, पर उसने मेरे एक ना सुनी,और अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर करने लगा… मेरी चूत से खून निकल कर मेरी जाँघो तक फेल चुका था..खून निकलने का पता मुझे सुबह चला, जब मे सुबह कपड़े पहनने के लिए उठी थी..दर्द के मारे मेरी जान निकली जा रही थी…पर दरिंदे ने मुझ पर कोई तरस नही खाया…ना ही उसने मुझे प्यार किया, ना ही मेरी चुचियो को मसला, ना ही चूसा बस अपना लंड डाल कर, वो मुझे पेले जा रहा था…मे उसके भारी बदन के नीचे पड़ी दर्द को सहन कर रही थी…5 मिनट लगातार चोदने के बाद,उसका बदन अकडने लगा, और उसके लंड से पानी निकल गया…और मेरे ऊपेर निढाल होकर गिर गये…उसका सारा वजन मेरे ऊपेर था..मेने गोपाल को कंधों से पकड़ कर साइड करने के कॉसिश की….पर उसका वेट मुझसे कहीं ज़्यादा था..आख़िर कार वो खुद ही उठ कर बगल मे निढाल होकर गिर गया…

मेने राहत की साँस ली… मे अभी भी रो रही थी…मेने अपने पेटिकॉट को नीचे किया और, गोपाल की तरफ पीठ करके लेट गयी…वो तो 5 मिनट मे ही झाड़ कर सो गया था…उसके ख़र्राटों की आवाज़ से मुझे पता चला… मे बाथरूम जाना चाहती थी… पर मेरा पूरा बदन दुख रहा था… मेरे चूत सूज चुकी थी…इसलिए मे उठ भी ना

पे…और वहीं लेटे -2 मुझे कब नींद आ गये…मुझे नही पता…उसके बाद मुझे तब होश आया, जब मेरी सास ने मुझे सुबह उठाया…

मेरे सारे अरमान एक ही पल मे टूट गये थे… मे सोचने लगी काश के मेने मा को मना कर दिया होता…पर होनी को कोन टाल सकता है…अब यही मेरा जीवन है…मेने अपने आप से समझोता कर लिया…मेरी जिंदगी किसी मशीन की तरह हो गयी…दिन भर घर का काम करना, और रात को गोपाल से चुदाना यही मेरी नियती बन गयी थी…कुछ दिनो के बाद मेरी चूत थोड़ी सी खुल गयी…इस लिए अब मुझे दर्द नही होता था…पर गोपाल अपनी आदात के अनुसार, रोज रात को मेरे पेटिकॉट को ऊपेर उठा कर मुझे चोद देते… आज तक उन्होने मुझे कभी पूरा नंगा भी नही किया…

गोपाल जिस गाँव मे रहते थे…उस गाँव की औरतो से भी धीरे -2 मेरी पहचान होने लगी…उनकी चुदाई की बातों को सुन मे एक दम से मायूस हो जाती…पर मेने कभी अपने दिल की बात किसी से नही कही…बस चुप-चाप घुट-2 कर जीती रही…गोपाल मुझे ना तो शरीरक रूप से सन्तुस्त कर पाया, और ना ही उसे मेरे भावनाओ की कोई परवाह थी….दिन यूँ ही गुज़रते गये…मेरा ससुराल एक साधारण सा परिवार था…मेरे पति गोपाल ना ही बहुत ज़्यादा पढ़े लिखे थे, और ना ही कोई नौकरी करते थे…मेरे जेठ जी बहुत पढ़े लिखे आदमी थे…घर की ज़मीन जायदाद ज़्यादा नही थे… इसलिए घर को चलाना भी मुस्किल हो रहा था…जेठ जी सरकारी टीचर थे…पर वो अलग हो चुके थे…. ज़मीन को जो हिस्सा मेरे पति के हिस्से आया तो उसके भरोसे जीवन को चलना ना मुनकीन के बराबर था…

टाइम गुज़रता गया… पर टाइम के गुजरने के साथ घर के खर्चे भी बढ़ते गयी…मेरे शादी को 10 साल हो चुके थी…मे 28 साल की हो चुकी थी…पर मेरे कोई बच्चा नही हुआ था…और मे बच्चा चाहती भी नही थी…क्योंकि दीदी की बेटी को जो अब 14 साल की हो चुकी थी उसके खर्चे ही नही संभाल रहे थे…लड़की का नाम नेहा है… वो मुझे मा कह कर ही पुकारती थी…नेहा पर जवानी आ चुकी थी… उसकी चुचियो मे भी भराव आने लगा था…वो जानती थी कि मे उसकी असली मा नही हूँ, पर अब मुझमे वो अपनी मा को ही देखती थी…अब घर के हालत बहुत खराब हो चुके थे…घर का खरच भी सही ढंग से नही चल पा रहा था…

एक दिन सुबह मैं जल्दी उठ कर घेर मे गाय को चारा डालने गई तो मैने देखा की मेरा जेठ विजय मेरी जेठानी शांति से चिपका हुआ है और उसकी चुचियो को मसल रहा है मेरा हाथ इतना सेक्सी सीन देख कर खुद ही मेरी चूत पर चला गया मैं अपनी चूत मसल्ने लगी फिर मुझे होश आया कि कहीं वो दोनो मुझे देख ना ले इसलिए मैं वापस आने लगी लेकिन शायद उन्होने मुझे देख लिया था

शांति कपड़े ठीक करके दूध धोने बैठ गयी…और विजय बाहर आने लगा…मे एक दम से डर गयी…और वापिस मूड कर आने लगी…बाहर अभी भी अंधेरा था…मे अपने घर मे आ गयी..पर जैसे ही मे डोर बंद करने लगी…विजय आ गया, और डोर को धकेल कर अंदर आ गया…

मे: (हड़बड़ाते हुए) भाई साहब आप, कोई काम था….(मेरे हाथ पैर डर के मारे काँप रहे थे…)

विजय: क्यों क्या हुआ… भाग क्यों आई वहाँ से… अच्छा नही लगा क्या?

मे: (अंजान बनाने का नाटक करते हुए) कहाँ से भाई साहब मे समझी नही…

वो एक पल के लिए चुप हो गया….और मेरी तरफ देखते हुए उसने अपना लंड लूँगी से निकाल लिया…और एक ही झटके मे मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख लिया….

मे: ये क्या कर रहे हैं भाई साहब? छोड़ो मुझे (गुस्से से बोली)

विजय: अब मुझसे क्या शरमाना मेरी जान….वहाँ तो देख देख कर अपनी चूत को मसल रही थी…अब क्या हुआ…

मे: (अपने हाथ को छुड़ाने के कॉसिश करते हुए गुस्से से बोली) देखिए भाई साहब आप जो कर रहे है, ठीक नही कर रहे है…मेरा हाथ छोड़ दो…

विजय ने अपने होंटो पर बेहूदा सी मुस्कान लाते हुए मुझे धक्का दे कर दीवार से सटा दिया…और मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर मेरी कमर को पीछे दीवार से सटा दिया…..मेरी सारी का पल्लू नीचे गिर गया…और मेरे ब्लाउस मे तनी हुई चुचिया मेरे जेठ जी के सामने आ गयी…उन्होने एक हाथ से मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर दीवार से सताए रखा…फिर वो पैरो के बल नीचे बैठ गये…और मेरी सारी और पेटिकॉट को ऊपेर करने लगे…मेरी तो डर के मारे जान निकली जा रही थी…कि कहीं कोई उठ ना जाए…घर पर बच्चे और सास ससुर थे….अगर वो मुझे इस हालत मे देख लेते तो मे कहीं की ना रहती…..मे अपनी तरफ से छूटने का पूरी कोशिश कर रही थी…पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी….उसने तब तक मेरे सारी और पेटिकॉट को मेरी जाँघो तक उठा दिया था….और अपनी कमीनी नज़रों से मेरी दूध जैसी गोरी और मुलायम जाँघो को देख रहा था….अचानक उन्होने ने मेरी सारी और पेटिकॉट को एक झटके मे मेरे चुतडो तक ऊपेर उठा दिया…मेरी ब्लॅक कलर की पॅंटी अब उनकी आँखों के सामने थी…इससे पहले कि मे और कुछ कर पाती या बोलती, उसने अपने होंटो को मेरी जाँघो पर रख दिया…मेरे जिस्म मे करेंट सा दौड़ गया…बदन मे मस्ती और उतेजना की लहर दौड़ गयी…और ना चाहते हुए भी मुँह से एक कामुक और अश्लील सिसकारी निकल गयी…जो उसने सुन ली वो तेज़ी से अपने होटो को मेरी जाँघो पर रगड़ने लगा…मेरे हाथ पैर मेरा साथ छोड़ रहे थे…उन्होने ने मेरे दोनो हाथों को छोड़ दिया…और अपने दोनो हाथों को मेरी सारी और पेटिकॉट के नीचे से लेजा कर मेरे चुतडो को मेरी पनटी के ऊपेर से पकड़ लिया….मेरा जिस्म काँप उठा…आज कई महीनो बाद किसी ने मुझे मेरे चुतडो पर छुआ था…वो मेरी जाँघो को चूमता हुआ ऊपेर आने लगा…और मेरी पॅंटी के ऊपेर से मेरी चूत की फांकों पर अपने होंटो को रख दिया ….मे अपने हाथों से अपने जेठ के कंधों को पकड़ कर पीछे धकेल रही थी…पॅंटी के ऊपेर से ही चूत पर उनके होंटो को महसूस करके मे एक दम कमजोर पड़ गयी…

मे: (अब मेने विरोध करना छोड़ दिया था बस अपने मर्यादा का ख़याल रखते हुए मना कर रही थी) नही भाई साहब छोड़ दो जी…कोई आ जाएगा…. अहह नही ओह्ह्ह्ह  बच्चे उठ जाएँगे ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह......... फिर भाई साहब ने मुझे 30 मिनट तक लगातार चोदने के बाद अपना वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया और मेरे  ऊपर लेट गए मेरी आँखों से आंसू टपक रहे थे और मेरी चूत  मुठ टपक रहा था... फोटो देखने के लिये यंहा क्लिक करे >>>

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