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 सूदखोर के लंड ने गरीब की बेटी की कुंवारी चुद फाड़ी - hindi sex stories

 सूदखोर के लंड ने गरीब की बेटी की कुंवारी चुद फाड़ी - hindi sex stories : पान्डेय जी, सूद बांटते हैं, और बदले में कभी कभी या अक्सर ही चूत की आमदनी हो ही जाती है। कहानी है यूपी बिहार के बैक ग्राउंड की। कहने को तो विकास देश में बहुत हुआ है और लोगों को फंडिंग के बहुत सोर्स उपलब्ध हो गए हैं पर सच तो ये है कि आज भी गरीब आदमी के पास सबसे बड़ी पूंजी उसके बहू बेटियों की इज्जत है जिसे गिरवी रख कर वह अपना पेट पालता है। प्रेम एक दिहाड़ी मजदूर है, दारू की लत अलग है, बिना दारु पिये बदन टूटता है और फिर दारु पीने पर पेट जलता है। पैसे की जरुरत गाहे बगाहे पड़ती ही रहती है और इसलिए गांव के ही पांडे जी को पकड़ के कुछ रुपया ले लिया। एक बार जब फ्री का रुपया बिना काम किये मिलता है तो फिर कर्जा लेने का मन और करता है। इसी चक्कर में दुबारा और तीबारा। अब कर्जे का बोझ कुछ इस तरह बढा कि प्रेम को भागना पड़ा गांव छोड़ कर के। बची बीबी और बेटी। सो घर में अक्सर पाँडे जी उसके पति को खोजते हुए आंए। आने पर न मिलने पर गाली गलौज और फिर वही, धमकी।

एक दिन नजर पड़ गयी प्रेम की छमिया, पर नयी नयी जवानी, किशोरी की खिलती उमर में बिकसित होते मस्त मस्त चूंचे मस्तानी गांड और फिर फटे कपड़ों में झांकती वो जवानी, तौबा तौबा, सोच के गीले हो गये कि इसकी चूत कितनी सुन्दर होगी। इतनी सुन्दर चीज अब तक छुपाए रखी, कोई गल नहीं वैसे भी पैसा तो ये देने से रही, कम से कम इसकी जवानी को ले कर मजे लेने से संतोष तो मिलता रहेगा। पांडे जी ने कहा प्रेम की बीबी से, देख, कल पैसे दे देना नहीं तो अपनी बेटी को मेर पास भेज देना, नहीं तो पुलिस बुलाउंगा और फिर केस कर दूंगा। जानती ही हो पुलिस वाले कितने जालिम होते हैं आएंगे तो तेरी तो लेंगे ही, तेरी बिटिया की भी लेन्गे और मिल जुल कर लेन्गे। और तो तेरे पास देने को कुछ है नहीं। मेरे पास भेजोगी तो इज्जत का और बुर का फालूदा तो कम से कम नहीं बनेगा। इतना सुन कर वो सोचने लगी, पर अगर पांडे के घर बिटिया को भेजूंगी तो बहुत शिकायत होगी, कम से कम वो सूद वसूलने मेरे घर आता है तो तभी कह दूंगी, थोड़ी छम्मो उसका मन बहला देगी। खैर अगले दिन अल्ल सुबह पांडे जी आ धमके। आते ही गाली शुरु कर दी, माधरचोद, पैसा तो देना नहीं है इक काम बोला था वो भी नहीं की।

रंडी कहिंकी चल दिखाते हैं तुझको अब चुलबुल पान्डे की दबंगैई। इतने पर प्रेम की बीबी आई और पैर पकड़े के बोली, साहेब्ब माफ कर दो, आपके घर भेजने में ज्यादा बदनामी होगी, जाके देखो उस कमरे में मेरी बिटिया आपका इंत्जार कर रही है। इस बात पर पांडे जी खुश हुए और उसके कमरे में घुस गये। घुसते ही सिटकनी अंदर से लगा दी। बाहर से प्रेम की बीबी बोल रही थी ” रहम मालिक मेरी बेटी अभी नादान है” पर पांडे जी पर तो भूत सवार था। छम्मो अपने घुटनों में सर छुपाए, कच्ची कली सी लजाई और सहमी बैठी थी, पांडे जी ने जाकर उसको उठाया और उसकी गांड सहलाते हुए बोले, तू तो पूरी जवान है रे, चल नखरे मत कर!! और उन्होंने उसकी सलवार खोल दी, अब उसका निचला हिस्सा पूरा नंगा। गरीब को इस देश में चढ्ढी भी नसीब नहीं होती, सच तो ये है कि चढ्ढिया बहुत महंगी हो गयी हैं, अरे मजाक नहीं बाबा, जौकी की खरीद के देखो, ना उतने में एक गरीब लड़की की पूरी ड्रेस आ जाती है।

और आखिर में पान्डे ने उसकी बेटी को खाट पर पेलने का उपाय लगा ही लिया।

वो तो भला हो देल्ही के चोर बाजार का कि वहां की चढ्ढियां और कपड़े पहन के दिल्ली के गरीबों की बेटियां हिरोईन बनी फिरती हैं। चलिए कहानी पर चलते हैं,  खैर हम बात कर रहे थे कि छम्मो ने चढ्ढी नहीं पहनी थी और अब उसका आधा बदन नंगा था। पान्डे ने उसकी गांड सहलाते हुए दूसरा हाथ उसके चूत के बालों पर रगड़ा। “आह्ह!! साली रसीली झंटियाली बुर”, साली हरामखोरों ने छुपा के रखा था इसको, मेरे लन्ड से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। और अपनी धोती उठा के अपना लौड़ा निकाल लिया। छम्मो ने उसे देख कर के अपनी आंखें मूंद लीं। पान्डे का दिमाग गरम, साली!! आंखें छुपाती है, और अपना हथोड़ा उसके हाथ में थमा दिया, ले मूठ मार साली। छम्मो ने मूठ मारने की जगह धीरे धीरे अपने हाथों की पकड़ लंड पर बनाई। करना ही था, पैसे के बदले में कुछ तो देना ही था। सो अब उसने हार मान ली, आंखें खोली और धीरे से बोली – जो भी करना तुम आराम से करना, प्लीज मैने ये सब  पहले कभी नहीं किया। पांडे ने लंड को गरम करते हुए छम्मो के हाथों में देकर कहा। ले अब इसे पकड़ के सहला, और जब खड़ा हो जाए तो मुह में ले लेना। पाड़े जी खाट पर लेट गये। लुंगी खोल के रख दी और फिर लेटे लेटे छम्मो से सहलवाने लगे। अब छम्मो ने देखा, सात इंच बड़ा, मोटा लंड उसकी छोटी चूत में कैसे जाएगा। पांडे जी ने लेटे लेटे उसकी झांटदार चूत में उंगली करनी शुरु कर दी। बोले ” काहें बे छम्मो, बनाती नहीं है क्या अपनी झांटों को तुम? क्या बात है मम्मी तुम्हारी रेजर के लिए पैसे नहीं देती?” चूत में उंगली जाने से गनगनाती हुई छम्मो ने  अपनी टांगे सिकोड़ी तो चूत और भी संकरी हो गयी। पान्डे ने झल्लाते हुए कहा, साली छुपाती काहे है ना देखने दे अपनी दुकान! समझ में नहीं आता, इन गरीबों को भी शरम होती है। पान्डे आज भी उसी पुरानी सामंतवादी मानसिकता का परिचय दे रहा था। खैर छम्मो ने अपनी चूत अपने मालिक के लिए खोल दी। आज वो सब कुछ था उसके परिवार का। पान्डे ने उंगली अंदर करके उसके भग, बोले तो देहात में उसे बेलकौड़ी कहते हैं उसको सहलाने लगा। लंड पर छम्मो की पकड़ बढ गयी। उसने अब रगड़ घनी कर दी, और पान्डे के मुह से निकलने लगा ” आह्ह!! साली मस्त कर रही है!! ऐसे ही कर। और उसने उसकी चूत में उंगली और अंदर ठेल दी। अगले भाग में पढें कैसे सूद में चूत का सिलसिला जारी रहा।