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वेश्याओं से सुनिए उन मर्दों की कहानी हिंदी में

वेश्याओं से सुनिए उन मर्दों की कहानी हिंदी में

वेश्याओं से सुनिए उन मर्दों की कहानी हिंदी में

वेश्याओं से सुनिए उन मर्दों की कहानी हिंदी में : वेश्याओं अर्थात रंडियो की सोच बिल्कुल साफ है. वे उन मर्दो को चूमना नहीं चाहतीं जिन्होंने सेक्स के लिए पैसे दिए हैं. उन्होंने यह भी बता दिया जिन मर्दों से बदबू आती है..या जो गालियां बकते और अपनी दुख भरी कहानियां सुनते हैं. वे उनके साथ सेक्स करना नहीं चाहतीं. यह भी देखे लंड खड़ा हो जायगा >>> पेशाब पिलाया दादा जी और उनके दोस्तों ने पोती को – Images =>वे मर्द तो और भी उबाऊ हैं जो कहते हैं कि उन्हें अपनी बीवियों से नफरत है. वेश्यालयों की वेश्याओं की जुबान खुली तो रंडी खाने आने वाले मर्दों के बारे में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आने लगी. ऐसा लगा जैसे सेक्स अर्थात चुदाई के लिये उनकी सहमति नहीं है लेकिन उन्हें खरीद लिया गया हो. यहां कई अजीबोगरीब चीजें होती हैं लेकिन अब इन वेश्याओं को उसकी परवाह नहीं.

मैं मानती रही हूं कि वेश्यालय केवल वेश्याओं से सेक्स की जगह नहीं हैं बल्कि वेश्याओं के साथ कामोत्तेजनाएं मिटाने की जगह भी हैं. कोई उन्हें वेश्याओं को यातना दी जाने वाली जगह के रूप में भी देख सकता है जहां मर्द अपने मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए अपनी कल्पनाओं को शुद्ध करते हैं. एक बार, जब मैंने वेश्याओं से पूछा कि उन्हें क्या-क्या भोगना पड़ा, उन्होंने ऐसे मर्दों की कहानियां सुनाई जिन्हें वेश्याओं को दुल्हन के जोड़े पहनाना, और रोल प्ले कराना पसंद था. ये सब रोमांटिक था, और उन्हें ये सब बुरा भी नहीं लगा.

ऐसा आदमी जो उनके कपड़े उतारकर खुद पहन लेता हो, या दूसरा जो रजस्वला स्त्री के कपड़े धोने के लिए पूछे. वो ऐसी कल्पनाओं पर हंसा करती थीं, फिर भी वे पुरुषों को ऐसा करने देतीं क्योंकि इससे उन्हें पैसे मिलते थे. किसी वेश्या ने बताया कि एक आदमी इतना कामुक था कि उसने एक वेश्या को पंखे से लटका दिया और उसे मारा. और वेश्या ने भी ये सब सहा क्योंकि उसे पैसा कमाना था और आगे बढ़ना था. कई रंडियो ने बताया की कई आदमी चुदाई के बाद अपना लंड हमारे मुह में डाल कर हमें मुठ पिने पर मजबूर भी करते है हमें अपना वीर्य चटवाते है और अपना लिंग चुसवाते है

बहुत पहले की बात है, वेश्याएं पुरुषों के बारे में क्या सोचती हैं, मैंने इस बारे में एक लेख लिखा था. ये बहिष्कृत औरतें अपने ग्राहकों के बारे में क्या सोचती हैं ये उसकी कहानी थी. और वो हमेशा यही कहतीं कि वो आदमियों को ' चुतिया' समझती हैं. वे आदमी जो उनकी गंदी सीढि़यां चढ़कर आते हैं, या वो जो उन गलियों से औरतों को उठाकर बक्से जैसे कमरों में ले जाते हैं वो नैतिकता के सवालों से मुक्त हैं.

वो जानते थे कि उन्हें कोई नहीं आंकेगा, और एक वेश्या के आंकलन की कोई कीमत नहीं. इसलिए वे वेश्याओं के सामने उनमुक्त हो जाते थे और उन्हें पैसे देते थे जिससे कि वे उसे पीट सकें, और दूसरे तरीकों से उन पर हावी हो सकें. वेश्याएं बुद्धिमान होती हैं. वो जानती हैं कि आदमियों का मन बीमार होता है, और अगर उन्हें मौका मिले तो वे और खेलेंगे और अगर वे सावधान नहीं रहीं तो जाल में फंस जाएंगी. ऐसा भी नहीं है कि इस जाल में अभी तक कोई फंसी नहीं.

मैं उस युवा गर्भवती महिला से कमाठीपुरा की एक छोटी सी माइक्रोफाइनेंस यूनिट में मिली थी, जहां वो कुछ पैसे जमा कराने आई थी. पास के होटल में काम करने वाले आदमी के साथ उसकी शादी हुई थी, उसे आशा थी कि वो उसे प्यार करेगा, लेकिन उसने उसे अपना शरीर बेचने के लिए कहा जिससे कि वो और पैसे कमा सके, और उसने ऐसा ही किया. वो निराश थी. लेकिन उसे पता था कि आखिर में उसे प्यार के कुछ शब्द सुनने को मिलेंगे और वो उसके लिए काफी हैं. उसकी कहानी बहुत दुखद थी, लेकिन सभी कि कहानियां एक जैसी ही थी. इन महिलाओं ने पुरुषों को इस तरह से समझा जो हम कभी नहीं समझ सकते, और ये प्रेम और रोमांस के भ्रम के आधीन भी नहीं थीं.

वे रंडिया कैसी परिस्थिति से गुजरी होंगी, पैसो के के खातिर कैसे अनजान आदमी के सामने कपडे उतार कर पलंग पर नंगे हो कर पड़  जाती होगी , कैसे अपने शरीर के लिए मिलने वाले पैसे का लेखा-जोखा किया होगा.. वेश्याएं जानती हैं कि उन्हें पैसे के हिसाब से अपनी सेवा देनी है. यहां कुछ भी मुफ्त नहीं है और वे किसी नैतिकता से भी नहीं बंधी है कि इन बातों की खुल कर चर्चा न कर सकें. हर कोई यहां ये काम पैसे के लिए कर रहा है. इस धंधे के आगे उनके व्यक्तिगत चुनाव का कोई महत्व नहीं है. और इसलिए वे यहां जो भी करती हैं, हक के साथ करती हैं.

वेश्यालय इतने लंबे समय से चल रहे हैं. उनकी छवि अय्याशी के अड्डे के तौर पर रही है. लेकिन इन दिनों यहां भी उदार तरह की बातें जैसे महिलाओं को बचाने या उनकी तस्करी खत्म करने पर बहस हो रही है. लेकिन यह बातें अभी बस एक सुहाने सपने की तरह ही लग रही हैं. सभी की कहानी यहां एक है. दुत्कार दिए जाने वाली और दुख भरी कहानी सबके पास है. लेकिन यहां एक दूसरी कहानी भी है. दूसरा एंगल है. महिलाएं यहां एक-दूसरे को परख नहीं रही. सबका मकसद बस पैसा कमाना है और पैसे पर ही बात होती है.

कई महीनों के मेल-जोल और बातचीत के बाद मैंने उनकी कहानी, उनके विचार को जाना. यह भी समझा कि उनके लिए अपने सेक्सुअलिटी को जाहिर कर पाना और इस पर बात करना कितना मुश्किल है. यहां मैं ऐसी महिलाओं और पुरुषों से मिली जो अच्छे पढ़े-लिखे हैं, उदारवादी हैं. उनमें कुछ तो एक्टिविस्ट हैं और अपनी महिलावादी पहचान प्रकट भी करते हैं. लेकिन फिर भी वे छिपे हुए हैं. उनका एक