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कहानी के पहले सीरियल ‘बेटी सीमा को फौजी का लंड” में पढा आपने कि कैसे सीमा ने अपनी जवानी और चूंचे का जलवा दिखा कर अपने फौजी बाप को फांसने के लिए इस्तेमाल किया। अब उस सीन से आगे चलते हैं जहां कि फौजी ने अपने होठों से बाथरुम में अपनी बेटी के जवान बदन और चूंचे से टपकता पानी पीना शुरु किया था

इस प्रकार से जैसे उसने अपनी बेटी सीमा के नाभि पर जीभ लगाई, और उपर चूंचों से छन के आते हुए पानी को पीने लगा, सीमा को ऐसा लगा जैसे कि उसकी नाभि एक दम सुर सुराहट से भर गयी हो। कसम से इस एहसास को पाने के लिए वो सालों से तड़प रही थी और आज उसका सपना सच हो रहा था। इधर सिपाही का लंड भी एक दम दन्नाया हुआ था।

उसको हमेशा यह लगता था कि उसकी मां उसके साथ ना इंसाफी करती है और आज उसको पता चल गया था कि इस खेल में कितना मजा आता है। उसने सिपाही के बाल पकड़ कर के अपने नाभि की तरफ उसका सिर और जोर से दबा दिया। उसके बाप की नाक और होठ सब उसके सेक्सी बद्न को टच कर रहे थे। इस बात पर उसके पापा ने उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसाकर फिरानी शुरु कर दी। सीमा ने उत्तेजित होकर आंखें बंद कर लीं और कहने लगी, आह्ह पापा बहुत अच्छा लग रहा है। वो बोल रही थी और उसके बाप का जोश बढता जा रहा था। सच में आज सिपाही ने देखा कि वो उसकी बीबी जैसी ही दिखती है, जवानी में सीमा की मां भी तो ऐसा ही दिखती थी। फिर क्या था, उसने अपनी बेटी को चोदने के बारे में अपना निश्चय दृढ कर लिया। वैसे भी, उसकी जवानी और मस्त चूंचे के आगे अब उसकी मां फीकी पड़ चु्की थी।

मस्त चूंचे देख कर रिश्ता भूला।

उसने उसकी कोमल त्वचा का रस लेने के लिए जीभ उसके नाभि से उपर बढाई। एक एक इंच सरकते हुए उपर की तरफ, उसने हर इंच को अच्छे से चूमा। पूरी जीभ उसके बदन के हर अक्षांश और देशांतर रे्खा पर फिराने के साथ ही साथ आज उसका इरादा अपनी कुंवारी बेटी के कुंवारे बदन को वो मजा देना था कि बस वो अपने बाप की बन के रह जाए। हालांकि वह जानता था कि यह थाना उसका नहीं है पर उसको तो दूसरे के थाने में ड्यूटी देने की इच्छा थी। अप्ने दामाद के लिए वह काम सुगम बनाने जा रहा था। उसने नाभि से उपर सारा पेट चूम लिया। और फिर पीछे घूम गया। जींस बांधने की जगह से उपर की पीठ पर जीभ की नोक से स्पर्श करते हुए उसने हल्की लार टपकानी भी जारी रखी। भीगा बदन, गर्म जीभ और गर्म बदन के साथ ही उसने सीमा के बदन की गरमी और भी बढानी जारी रखी।

चूसते हुए सीमा के बदन को उसने पूरी नंगी पीठ चूस डाली। अब सीमा अपनी पीठ सिकोड कर यह बता रही थी कि उसको और मजा चाहिए। उसने ब्रा का एक हुक खोल दिया। एक चूंची आगे की तरफ लटक गयी।

अब सिपाही सामने आकर अपनी सीमा बेटी के उस नंगे चूंचे को पकड़ कर के दबाने लगा। ऐसे जैसे कि दूहने की कोशिश कर रहा हो। इस अदा पर सीमा को बहुत आनंद मिल रहा था क्योंकि उसने सर उपर करके आंखें मूंद ली थी और पूरी उत्तेजना को पीने की कोशिश कर रही थी। सिपाही ने उसके चूंचे को मसल के रख दिया और जब वह एक दम लाल और कड़ा हो गया, अपने मुह से लगाकर स्तन पान करने लगा। आह्ह्, आह्ह करती सीमा ने खुद ही दूसरा चूंचा खोल कर अपने बाप के हाथों में थमा दिया।

बारी बारी से चूसे चूंचे।

सिपाही अपनी जीत पर मुस्कराया और उसके दूसरे चूंचे को दूहते हुए पहले वाले को चूसता रहा। वो एकदम मस्ती में डोलती रही और खड़े खड़े बाथरुम में ही चुसवाती रही। खैर अब सिपाही ने दूसरे चूंचे का भी वही हश्र किया और आखिर में उसको भी अच्छे से चूसा। चूंचे अब देखने में साढे छत्तीस लग रहे थे। अब बारी थी नीचे कुछ करने की, सीमा ने अपनी पैंटी सरका दी और फिर अपने हाथों से अपनी नंगी चूत ढंक ली।

उसको ऐसा करते देख सिपाही ने सोचा साली गयी है एक दम अपनी रंडी मां पर पर क्या करें चोदने में इसे बहुत मजा आने वाला है। और उसने उसके गांड की तरफ मुह करके उसके दोनों गांड की गोलाईयों को दबोच लिया अपने हाथों से। दबोचने के बाद उसने जोर से उनको दबाया। और हल्के हल्के चपत तेजी से लगाने शुरु कर दिये। गांड हर थपकी के बाद हिल हिल कर अपनी पोजिशन पर आजाती और फिर उस्का बाप उसी तरह से उसको थपथपाता। उसकी गोरी नाजुक चमड़ी एक दम से लाल हो गयी अपने बाप के थपेड़ों से तो उसके बाप ने अपने मुह से एक बड़ा बाईट उसकी गांड पर लिया, ऐसे जैसे कि तरबूज खा रहा हो। सीमा चिल्लाई, पर उसने हल्के दांतों का अहसास कराया था, जो कि उसको अच्छा लगा। वो उत्तेजना में फुसफुसाई, काट लो मेरी गांड को।

और सिपाही ने दूसरे नितंब को भी ऐसे ही किया, हल्के दांत गड़ाकर उसकी गांड को चुदवाने के लिए पैंपर कर लिया। सच तो ये है सिपाही भी बड़ा खिलाड़ी था। चुदाई के मामले में वो राउडी था, भले ही उसकी बीबी उसको सीधा समझती हो।

दोनों नितम्बों को काटकर के उसने अब दो उंगलियां जोड़ीं, हल्का साबुन अपनी बेटी के गांड पर मला और फिर धीरे धीरे करके, उसमें अपने दो उंगलिओं को ठेलने लगा। सीमा चिल्लाई, उईईई, पर कोई बात नहीं थोड़ी देर में दोनों उंगलियां अंदर थीं। अब सिपाही ने अपनी बेटी की गांड फड़ाई शुरु कर दी थी। एक नया अहसास था यह। पीछे से गांड में उंगली पेलने के बाद सिपाही सामने की तरफ आ गया और उसने सीमा के चूत के फांकों पर अपने दोनों होठ रख दिये। इस तरह से उसने होठ रखे कि दोनों होठ एक दम से उसके चूत के फांकों की लंबाई की दिशा में थे। अब वो अपनी कुंवारी बेटी की बुर को चाट चाट कर एक दम रसीली बना देने पर तुल गया था। तो सिपाही अब अपनी बिटिया को चोदने से पहले बुरचटाई के रस्म से नवाज रहा था, मजे से चूत चुसवाती हुई सीमा अपने दोनों चूंचे मल रही थी और बार बार अपनी टांगें सटा के अपने पापा के मुह को दोनों टांगों के बीच चांप दे रही थी। यह एक अत्यंत रोमांचकारी अनुभव था उसके लिए। उसके मुह से सिर्फ एक ही शब्द निकल रहा था, आई लव यू पापा, आप कितने अच्छे हो। आह्ह चूस लो, आह्ह्ह ये तो और अच्छा है, प्लीज फिर से करो ना। कहानी के अगले भाग में पढिए कैसे चूंचे से चूत तक का सफर तय किया उसके पापा ने।

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