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दोस्त की बहन को बाथटब में चोदा 1 - लंड से निकली क्रीम उसकी चूत से टपकने लगी

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हैल्लो डियर.. Indian Sex Bazar के सभी चाहने वालो को मेरा नमस्ते। दोस्तों आज में अपने एक सेक्स अनुभव के पहले भाग के साथ आया हूँ। अब में आप सभी का ज्यादा समय खराब ना करते हुए स्टोरी शुरू करता हूँ:-

मेरे दोस्त की बहन रश्मि की शादी थी और अगले दिन उसको उबटन लगना था। रश्मि की दोनों सिस्टर शन्नो और प्रीति और रश्मि की फ्रेंड्स.. रश्मि को उबटन लगाने के लिए अंदर वाले आँगन में ले गयी और साथ में कुछ आंटीयां भी थी। फिर ब्यूटीशियन और उसकी सिस्टर, फ्रेंड्स और उसकी रिश्तेदार लेडिस रश्मि को उबटन लगा रही थी। में ऊपर छत पर जाकर जमीन पर लेट गया और जाली से नीचे झाँककर रश्मि को उबटन लगते हुए देख रहा था.. क्योंकि अंदर किसी भी जेंट्स का जाना मना था। उबटन लगने के टाईम पर रश्मि ने केवल पेटीकोट और ब्लाउज पहना हुआ था और उसकी कमर पूरी खुली हुई थी और पेटीकोट भी जाँघ तक ऊपर उठाया हुआ था।

फिर सभी लेडिस उसकी गोरी गोरी गोल गोल जाँघो पर और उसके हाथ और उसकी नंगी कमर पर उबटन लगा रही थी। मैंने पहली बार किसी लड़की को उबटन लगते हुए देखा था और रश्मि की गोरी गोरी जाँघो को और उसकी सुंदर कमर को देखकर मेरा लंड बहुत टाईट और कड़क हो गया। मेरा लंड मुझे परेशान करने लगा तो मैंने ऊपर छत पर ही अपना लंड निकाल लिया। मेरा लंड लोहे की रोड की तरह कड़क हो चुका था और इतना गरम था जैसे कि लोहे के सरिये को अभी अभी आग की भट्टी से निकाला हो और फिर मैंने वहीं पर मुठ मारकर अपने लंड की तड़प को ठंडा किया और फिर से छिपकर नीचे देखने लगा। फिर सब लोग रश्मि को अंदर उसके रूम में ले गये और उसकी सिस्टर प्रीति और एक दो फ्रेंड्स को रश्मि के पास छोड़कर बाकी लोग बाहर आ गये और वो लोग दूसरे कामो में व्यस्त हो गये। रश्मि के रूम का दरवाजा बंद था और रूम के अंदर से सब लड़कियों के हंसने की आवाज़ आ रही थी। फिर में भी रूम के पास ही एक परिचित अंकल के पास खड़ा था कि तभी रश्मि की मम्मी ने दरवाजा बजाकर रश्मि को बोला कि जल्दी से नहा ले.. क्योंकि थोड़ी देर के बाद शाम होने वाली थी और मेहन्दी की रस्म अदा करनी है। रश्मि और उसकी बड़ी बहन प्रीति का एक ही रूम था और रश्मि के भाई संजू और रोमी का दूसरा रूम था.. लेकिन दोनों रूम के बीच में एक ही टॉयलेट था जिसका दरवाजा दोनों ही रूम से था।

फिर मैंने जैसे ही सुना कि रश्मि नहाने जा रही है तो मेरा शैतानी दिमाग़ हरकत में आया और में धीरे से वहाँ से खिसक कर रोमी के रूम में चला गया और बाथरूम के दरवाजे का लॉक खोलकर के रश्मि के बाथरूम के अंदर आने का इंतज़ार करने लगा और जैसे ही रश्मि अपने रूम से बाथरूम के अंदर आई तो में भी रोमी के रूम से दरवाजा खोलकर बाथरूम के अंदर चला गया.. लेकिन इससे पहले की रश्मि कुछ बोलती मैंने उसके मुहं पर अपना एक हाथ रख दिया और उसे चुप रहने को कहा। फिर वो धीरे से बोली कि तुम यह क्या कर रहे हो? और किसी को पता चल गया तो क्या होगा? तो मैंने धीरे से उसके पास आ कर बोला कि सभी लोग अपने अपने कामो में व्यस्त है और किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा क्योंकि सभी को पता है.. कि तुम बाथरूम में हो और बालों को शेम्पू करने और उबटन उतारने में वैसे भी बहुत टाईम लगता है बस तुम थोड़ा हिम्मत से काम लो।

फिर वो थोड़ा नॉर्मल हो गयी और मैंने उससे कहा कि क्या तुम कभी किसी मर्द के हाथ से नहाई हो? तो वो बोली कि नहीं.. फिर मैंने उससे कहा कि चलो में आज तुम्हे नहलाता हूँ.. तुम्हे आज नहाने में जन्नत का मज़ा आएगा। तो रश्मि मुझसे बोली कि सबने मेरी जाँघो पर और कमर पर वैसे भी इतना उबटन लगा लगाकर मसाज की है.. में वैसे ही बहुत गरम हो गयी हूँ। फिर मैंने रश्मि का ब्लाउज उतार दिया और उसने अपना पेटीकोट और पेंटी भी उतार दी। मैंने भी अपने कपड़े उतारकर दरवाजा के हेंगर पर डाल दिए। अब मैंने अपने दांतो से उसकी कमर पर काटते हुए उसकी ब्रा के हुक खोले वो सिसक उठी। फिर मैंने उसके पूरे जिस्म पर पानी डाला और उसके उबटन को धोने लगा और वो बिल्कुल शांत खड़ी हुई मजे कर रही थी। मैंने जल्दी जल्दी उसका उबटन साफ किया और फिर उसे स्टूल पर बैठा दिया और मैंने साबुन लेकर उसके जिस्म पर हल्के हल्के नरम नरम हाथों से लगाया और रश्मि के पीछे से जाकर उसके दोनों बूब्स की मसाज करने लगा और उसके जिस्म को मैंने ठंडे ठंडे पानी से नहलाया था.. लेकिन फिर भी उसके जिस्म से आग निकल रही थी और ऊपर से शावर की ठंडे पानी की धार उसके जिस्म में डबल आग लगा रही थी।

मैंने अपने हाथों में साबुन लिया और उसके पीछे से जाकर अपने दोनों हाथों से उसकी चूत पर सोप लगाने लगा। मैंने आज दिन के उजाले में उसकी चूत देखी तो मस्त हो गया और उसकी चूत ऐसी लग रही थी जैसे कि किसी नारंगी के दो टुकड़े आपस में जुड़े हो और उनके बीच की नरम चमकती हुई लाईन मेरे लंड को न्योता दे रही थी.. में उसकी चूत पर मसाज कर रहा था और धीरे धीरे रश्मि का बदन अकड़ता जा रहा था। फिर मैंने उसकी चूत पर मसाज करते करते धीरे से अपनी सीधे हाथ की छोटी ऊँगली को उसकी चूत के अंदर डाल दिया और अपने सीधे हाथ की छोटी ऊँगली से उसकी चूत के अंगूर को धीरे धीरे सहलाने लगा और उसकी पीठ को अपनी जीभ से चाट रहा था और कभी कभी उसकी कमर पर और उसकी गर्दन और कान