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बल्लू ही बुलाते हैं घर में उसे सब. वो यूपी का रहनेवाला हैं और मुंबई में उसे कुछ 3 साल हो चुके हैं. उसका बड़ा भाई श्याम मेरे चाचा के वहाँ नौकरी करता था और वो ही बल्लू को हमारे घर के काम के लिए ले के आया था. ये तो हुई कहानी के दुसरे किरदार की बात, अब मेरे बारे में. मैं रोशनी, मुंबई घाटकोपर की रहनेवाली. मेरी उम्र 24 साल हैं और मेरी शादी विलास से हुई हैं. विलास पुणे एक कंपनी में सोफ्टवेर ड़ेवेलोपर हैं और हमलोग ज्यादातर वही रहते हैं. यह बात हैं जनवरी 2012 की जब मैं संक्रांति के लिए मुंबई आई थी. विलास को कुछ असाइनमेंट सबमिट करना था इसलिए वो बाद में आनेवाला था. और उन दो दिनों के गेप में ही बल्लू मेरे ऊपर चढ़ गया. कैसे उसने भाभी की चुदाई की, तो सुनिए कैसे उसने यह घटना को अंजाम दिया. जैसे ही मैं टैक्सी से निचे उतरी बल्लू दौड़ता हुआ घर से बहार आया. उसने फट से मेरी बेग उठाई और बोला, “आओ भाभी जी कैसे हो आप, बहुत दिनों के बाद आये…!”

मैंने टैक्सी वाले को किराया दिया और बल्लू को कहा, “अरे बल्लू मैं पिछले महीने तो आई थी.”

“लेकिन ऐसा लगता हैं की एक जमाना हो गया.” बल्लू ने हँसते हुए कहा.

वैसे तो बल्लू ठीक ही था

मैं भी हंस पड़ी और अंदर चल पड़ी. मेरे ससुराल में विलास के माँ बाप और उसकी छोटी बहन रूपा रहते हैं. रूपा कोलेज के सेकण्ड इयर में पढ़ती हैं. वो एक बिगड़ी हुई लड़की हैं जो हमेंशा पार्टी मुड में रहती हैं. मैं जिस दिन आई उसी रात को सोसायटी में कही कथा का प्रबंध था और मेरे सास ससुर वहाँ गए हुए थे. रूपा तो कभी रात को 12 बजे से पहले घर में आई ही नहीं इसलिए घर में केवल मैं और बल्लू थे. रात का खाना खाने के पश्चात ही मेरे सास ससुर सोसायटी के नुक्कड़ पे चले गए थे. संक्रांति अभी कल थी इसलिए ठंडी का जोर अभी जारी ही था. मैंने स्वेटर निकाली और मैं अपने बेडरूम में जा के लेट गई. टेलीविजन में मैंने एक हिंदी में डब की हुई इंग्लिश मूवी लगाईं और बैठ गई. कुछ 10 मिनिट बाद बल्लू रूम में आया और उसने मुझे पूछा, “भाभी जी आप को कुछ चाहिए, मैं सोने के लिए जा रहा हूँ.”

मैं जैसे ही उसकी और मुड़ी मैंने देखा की वो मेरी चूंचियों की और देख रहा हैं. मैंने अपनी नाईटी को ऊपर किया और गले को थोडा ऊपर की और खिंचा. दरअसल मैंने ढीली नाईटी पहनी थी स्वेटर के निचे और स्वेटर उतार रखा था. क्यूंकि अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी इसलिए बल्लू ने अपनी इस भाभी की चुंची जरुर देख ली होंगी. मैंने उसे कहा, “नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए. जाते वक्त दरवाजा खिंच लेना जरा.”

बल्लू कमरे से निकला लेकिन उसकी आँखों में मुझे आज कुछ अलग भाव नजर आये. वो कमरे से निकलने तक मेरी और बड़ी कामुक नजरों से ताक रहा था. एकपल के लिए मैं थोड़ी डर सी गई. फिर मैंने सोचा की भाभी की चुदाई करने के लिए शायद उसके मन में सेक्स का कीड़ा आया होंगा. लेकिन दुसरे ही पल मैंने इस विचार को भी ख़ारिज कर दिया क्यूंकि बल्लू एक अच्छा नौकर था. मैंने फिल्म आधी ही देखी थी की मुझे नींद आ गई. टेली ओन रख के ही मैं सो गई और दरवाजे को स्टोपर लगाना भी भूल गई.

रूम में बल्लू आ धमका

कुछ समय बाद जब किसी मजबूत हाथ ने मेरे मुहं को कस के पकड़ा तब मेरी नींद खुल गई. मैंने देखा की वो बल्लू था उसने मेरा मुहं अपने हाथ से दबाया हुआ था. पहले तो मुझे यह एक बुरा सपना लगा जिसमे बल्लू अपनी भाभी की चुदाई करने पे उतारू हुआ था लेकिन जब उसने मेरे गाल पे चमाट लगाईं तब मेरी नींद अच्छी तरह खुल गई. बल्लू ने किचन से लाइ हुई मटन काटने वाली छुरी मेरे गले के ऊपर रख दी और बोला, “मादरचोद बड़ा लंड खड़ा करवाती हैं मेरा जब भी पुणे से आती हैं तू. आज तो तेरी चूत मार के ही रहूँगा. जरा जितनी भी आवाज की तो छुरी हलक में उतार दूंगा. और यहाँ लाउडस्पीकर के आवाज में तेरी आवाज मर के रह जायेंगी.”

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उसकी बात में दम था क्यूंकि बहार सच में लाउडस्पीकर की आवाज थी और मेरी आवाज शायद ही बहार कोई सुन सकता था. बल्लू भाभी की चुदाई में बड़ा दिलचस्प था और उसने वही पड़ी हुई मेरे दुपट्टे से मेरा मुहं बाँध दिया. एक ही झटके में बल्लू ने मेरी नाइटी फाड़ दी. उसका यह रौद्र स्वरूप मेरे लिए बड़ी नई चीज थी. हमेंशा भाभी जी भाभी जी करने वाला बल्लू आज भाभी की चुदाई करने पर उतारू हुआ था, वो भी जबरदस्ती से. बल्लू ने मेरे बड़े चुंचो को हाथ में पकड़ा और दबाने लगा. फिर उसे क्या सुझा की उसने और एक कपडा ले के मेरे हाथ बाँध दिए. अब मेरे चुंचे खुले पड़े थे बल्लू के सामने. उसने मेरी ट्रेक पेंट को पकड के एक ही झटके में खिंच दिया. और साथ ही में उसने अपने दुसरे हाथ से मेरी पेंटी निचे खिंच ली. अब मैं उसके सामने नंगी पड़ी हुई थी. मेरा मुहं और हाथ बंधे हुए थे.

मेरी चूत के ऊपर के घने बाल देख के तो वो जैसे पगला सा गया. उसने अपनी एक ऊँगली मेरी चूत के ऊपर रखी और बोला, “क्या बात हैं भाभी जी आप की भोसड़ी में तो बड़े बाल हैं.” और इतना कह के उसने सीधे ही ऊँगली मेरी चूत के अंदर डाल दी. एकदम से चूत के अंदर ऊँगली जाने से मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं चीखती भी कैसे मुहं तो बंधा हुआ था. बल्लू ने जाके पहले दरवाजे को बंध किया और स्टोपर लगा दी. वापस आके उसने अपनी पेंट खोली और उसे घुटनों तक उतार दी. उसने अंदर कच्छा नहीं पहना था और उसके लंड केआसपास कबूतर के घोंसले से भी ज्यादा बाल थे. और उपर से उसका लंड काफी काला और मोटा था जैसे किसी हब्सी का लंड. बल्लू सीधा मेरे पास आ खड़ा हुआ और उसने मुझे झांघो से पकड के ऊपर की और खिंचा. मेरी चूत वाला भाग थोडा ऊपर हुआ और उसने अपने लंड को सीधे ही चूत पे रख दिया. मुझे लगा की पहले तो लौड़े को चूत पर घिस के उसे चिकनी करेंगा लेकिन यह रेप था प्यार नहीं. और बल्लू ने फट से अपना कडा हुआ लौड़ा चूत में एक झटके में ही घुसा दिया….!

बांध के कर दी भाभी की चुदाई

“उईई माँ मर गई बाप रे….!” ऐसा मैं चीखी भी लेकिन आवाज बहार नहीं आई मेरी जरा भी. बल्लू ने मेरे चुंचो पर जोर से अपने पंजे लगाये और मुझे दर्द होने लगा. उसने फट से मेरी गांड को अपने हाथो में उठाया जिस से मैं थोड़ी ऊपर उठ गई. अब वो जोर जोर से अपने लंड के झटके मेरी चूत में लगाने लगा. ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने लोहे की सलाख को गरम कर के चूत में घुसेड दिया हो. बल